रहस्य -आकर्षण का नियम
आप जिंदगी में जो कुछ चाहते हैं,जैसा चाहते हैं,जब चाहते हैं,सब कुछ मिल सकता है,परन्तु उसके लिए आपको आयोजना बनाना या बनवाना चाहिए।लक्ष्य निर्धारण करके आयोजन को क्रियान्वित करना आना चाहिए और नहीं आता है तो सीखने के लिए सहमति आवश्यक है ।
सीखने के बाद लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए काम कीजिये ।आप क्या हैं ,कहाँ हैं ,क्यों हैं ,यह सब प्रश्न अर्थहीन हैं ।जीवन में सफलता हासिल करने के लिए लक्ष्य निर्धारण करके उसे पाना कठिन अवश्य है परन्तु असम्भव नहीं ।निर्धारित लक्ष्य को पाने के लिए प्रयास बार बार करना पड़ सकता है। साथ ही साथ लक्ष्य निर्धारण करने का कारण अवश्य मालूम होना चाहिए ।
पहला प्रश्न है की लक्ष्य कुछ भी हो उसको पा सकने का रहस्य क्या है ?इसका उत्तर है की आपको मालूम होना चाहिए की रहस्य को पा सकने वाले नियम को जीवन में कैसे लागू किया जाये ।भूतकालिक, वर्तमान, भविष्य के सभी प्रश्नो के समाधान का रहस्य भी यही है । मनुष्य ने ही उपग्रह को अंतरिक्ष में स्थापित किया है ,मनुष्य ने ही चन्द्रमा पर पहुंचने का रहस्य ढूंढा है यह भी अनुभव किया है की एक क्षण की गलती से बना हुआ काम बिगड़ भी सकता है ।मनुष्य बिना किसी भी समय अंतराल के सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में स्वयं के मन को घुमा कर वापस ला सकता है ।यह सब संभव होने का रहस्य है आकर्षण का नियम ।यह नियम क्या है ?इसको समझने का प्रयास कीजिये ।हम जो कुछ भी देखते हैं वह हमारे दिमाग में अंकित हो जाता है ,यही बात विचारों के साथ भी लागू होती है जो कुछ भी सोचते
हैं वही हमारे दिमाग पर अंकित हो जाता है,उसी के प्रति हम आकर्षित होने लगते हैं ।
इस संसार में ३से ४ प्रतिशत लोग ही बहुत रईस हो पाते है ऐसा क्यों ?क्योंकि उनको सामान्य
बुद्धि से आकर्षण के नियम के बारे में मालूम है जैसा सोचोगे वैसा ही पाओगे परन्तु ९५
प्रतिशत को यह बात समझाना पड़ती है उसके बाद भी उनकी बुद्धि इस बात को समझ नहीं पाती
है । समझने का प्रयास कीजिये की एक चुम्बक में लोहे को आकर्षित करने की शक्ति है ,आप
भी स्वयं को चुम्बक समझने का प्रयास कीजिये और बार बार सोचिये की लोग मेरी और आकर्षित
हो रहे हैं ,आप स्वयं देखेंगे की लोग आप से बात करना चाह रहे हैं।
एक जैसी पसंद के लोग एक
दूसरे को आकर्षित करते हैं ।आप जितना ज्यादा किसी भी चीज के बारे में सोचते हैं उसी
से संदर्भित विचारों को स्वयं की प्रति आकर्षित कर लेते हैं ।साथ ही हमें ध्यान में रखना होगा की जो लक्ष्य स्वयं ने निर्धारित
किया हैं उस पर रुकें और उसके बारे में सोच कर मन को साफ़ करें और संभव दिशा की और प्रयत्न
शील हो जाएं ।इससे हम वही करते हैं जो सोचते हैं साथ ही साथ दूसरे को भी स्वयं की और आकर्षित करते हैं । आकर्षण
के इस नियम को ४शब्दों में लिखा जा सकता हैं "विचार आकार लेते हैं "।विचार
में आवृत्ति होती है जिसे अंग्रेजी में फ्रीक्वेंसी कहा जाता है ।जो हम चाहते हैं उसको
बार बार सोचें ।आइये कुछ और विस्तार से बात करें ।कुछ लोगों की जिंदगी में बार बार
वही होता है जो वह नहीं चाहता है और फिर वह परेशांन होता हैं की मेरे साथ ही ऐसा क्यों हो रहा है ?
उत्तर साफ़ है की आकर्षण का नियम यह नहीं देखता है की आप क्या हैं? क्यों हैं? आदि, वह
तो बस विचारों के आवागमन के सिद्धांत को मानता है ,चाहे वह विचार गलत हो या सही ।आप
किसी भी चीज को देख कर जितना सकारात्मक सोचेंगे उतनी ही मात्रा में वही चीज हासिल हो
जाएगी ।आकर्षण का नियम निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है ।इसीलिए बुद्धि जीवियों ने कहा
है की सोचो कम और काम ज्यादा करो । एक कवी ने लिखा भी है की
काम करो तुम काम करो
जीवन में तुम नाम करो
यह जन्म हुआ किस अर्थ कहो
समझो जिसमें यह व्यर्थ न हो
कुछ तो उपयुक्त करो तन को
नर हो न निराश करो मन को
काम करो तुम काम करो
एक सकारात्मक सोच नकारात्मक विचार से कई गुना ज्यादा मजबूत होती है ,साथ ही यह बात भी सही है की विचारों के आने के बाद उसके क्रियन्वित होने में समय अंतराल भी हो सकता है । जो कुछ भी आप वर्तमान में सोचते हैं उसी के अनुसार आपका भविष्य बनता है ।
सोचने से ही भावनाएं बनती हैं उसी के अनुसार आपका स्वाभाव बनता है वही आपके भविष्य का निर्धारण करता है । यहाँ तक की अगर आपके हर दिन की शुरुआत अच्छी सोच के साथ होगी तो पूरा दिन अच्छा जाएगा ।आपको विचार और भावनाओं में अंतर करना आना चाहिए ।
आप प्यार ख़ुशी उमंग आदि की भावनाओं को यदि अनुभव भी करेंगे तो आपको वही सब मिल जाएगा ,भले ही यह सब आपको चाहिए या नहीं परन्तु सब मिलेगा यदि भावनाएं शुद्ध होंगी तो परिणाम भी अच्छा ही होगा ।आपका ब्रह्माण्ड आप खुद बनाते हैं "आकर्षण का नियम "यही बात विचारों के माध्यम से दोहराता है ।
प्रदीप
मेहरोत्रा
(वह लेख मैंने यु ट्यूब को देखने के बाद जिंदगी के अनुभवों से लिखा है )

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